रोशन जमाल-ए-यार से है अंजुमन तमाम | हसरत मोहानी

रोशन जमाल-ए-यार से है अंजुमन तमाम | हसरत मोहानी

रोशन जमाल-ए-यार से है अंजुमन तमाम
दहका हुआ है आतिश-ए-गुल से चमन तमाम

हैरत गुरूर-ए-हुस्न से शोख़ी से इज़तराब
दिल ने भी तेरे सीख लिए हैं चलन तमाम

अल्लाह हुस्न-ए-यार की ख़ूबी के ख़ुद-ब-ख़ुद
रंगीनियों में डूब गया पैरहन तमाम

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देखो तो हुस्न-ए-यार की जादू निगाहियाँ
बेहोश इक नज़र में हुई अंजुमन तमाम